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संसद के विशेष सत्र में सहमति न बनने की आशंका पहले से थी और यही होता दिख रहा है। महिला आरक्षण को लेकर सभी दलों में सहमति है, पर परिसीमन पर सहमति बनना कठिन है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जिस तरह से लोकसभा में विपक्ष को आड़े हाथ लिया है, उससे भी यही संकेत मिलता है कि बदलाव की राह आसान नहीं है। प्रमुख विपक्षी दल कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, द्रमुक न केवल नए बदलावों के खिलाफ एकजुट हैं, बल्कि इसे सरकार की साजिश करार दे रहे हैं। वास्तव में, इस पूरे मामले को राजनीतिक दृष्टि से देखा जा रहा है। राजनीतिक दलों से लेकर आम आदमी तक में यह चर्चा है कि महिला आरक्षण और परिसीमन से किसको लाभ होगा और किसको घाटा। माना जा रहा है कि दक्षिण के राज्यों को घाटा होगा और उत्तर के ताकतवर विपक्षी दल दक्षिण के राज्यों के साथ खड़े हो गए हैं। विपक्ष की यह राजनीतिक राह कम से कम उत्तर भारत में शायद जोखिम भरी हो सकती है।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को विपक्षी दलों को यही चेताया है कि महिलाओं के लिए किसी भी क्षेत्र में आरक्षण का विरोध करने वाले किसी व्यक्ति को महिलाओं ने नहीं बख्शा है। क्या वाकई, महिला आरक्षण के लागू न होने से महिलाएं नाराज होंगी? इस नाराजगी को विपक्ष समझता है, इसलिए विपक्ष के नेता बार-बार कह रहे हैं कि वे महिला आरक्षण के खिलाफ नहीं हैं। हालांकि, यह सच है कि लोकसभा और विधानसभा में महिला आरक्षण की बात जब भी आती है, कोई न कोई तकनीकी अड़ंगा लगा दिया जाता है। अगर फिर एक बार महिला आरक्षण लागू करने की कोशिशें नाकाम होती हैं, तो यह निस्संदेह निराशाजनक होगा। क्या परिसीमन का विरोध करने वाला विपक्ष सही है? क्या बिना परिसीमन के ही महिला आरक्षण वर्तमान सीटों में लागू करना बेहतर होगा? यदि हम महिलाओं की नजर से देखें, तो अभी लोकसभा में 14 प्रतिशत से भी कम महिलाएं हैं। देश में कोई पार्टी ऐसी नहीं है, जिसने महिलाओं को 33 प्रतिशत सीटों पर खड़ा किया हो। महिला आरक्षण की जब बात आती है, तब महिलाओं को पर्याप्त टिकट न देने वाले दलों को भी दलित-पिछड़ी और अल्पसंख्यक महिलाओं की बहुत चिंता होने लगती है।laln ds fo'ks"k l= esa lgefr u cuus dh vk'kadk igys ls Fkh vkSj ;gh gksrk fn[k jgk gSA efgyk vkj{k.k dks ysdj lHkh nyksa esa lgefr gS] ij ifjlheu ij lgefr cuuk dfBu gSA ç/kkuea=h ujsaæ eksnh us ftl rjg ls yksdlHkk esa foi{k dks vkM+s gkFk fy;k gS] mlls Hkh ;gh ladsr feyrk gS fd cnyko dh jkg vklku ugha gSA çeq[k foi{kh ny dkaxzsl] lektoknh ikVhZ] æeqd u dsoy u, cnykoksa ds f[kykQ ,dtqV gSa] cfYd bls ljdkj dh lkft'k djkj ns jgs gSaA okLro esa] bl iwjs ekeys dks jktuhfrd –f"V ls ns[kk tk jgk gSA jktuhfrd nyksa ls ysdj vke vkneh rd esa ;g ppkZ gS fd efgyk vkj{k.k vkSj ifjlheu ls fdldks ykHk gksxk vkSj fdldks ?kkVkA ekuk tk jgk gS fd nf{k.k ds jkT;ksa dks ?kkVk gksxk vkSj mÙkj ds rkdroj foi{kh ny nf{k.k ds jkT;ksa ds lkFk [kM+s gks x, gSaA foi{k dh ;g jktuhfrd jkg de ls de mÙkj Hkkjr esa 'kk;n tksf[ke Hkjh gks ldrh gSAç/kkuea=h ujsaæ eksnh us xq#okj dks foi{kh nyksa dks ;gh psrk;k gS fd efgykvksa ds fy, fdlh Hkh {ks= esa vkj{k.k dk fojks/k djus okys fdlh O;fä dks efgykvksa us ugha c['kk gSA D;k okdbZ] efgyk vkj{k.k ds ykxw u gksus ls efgyk,a ukjkt gksaxh\ bl ukjktxh dks foi{k le>rk gS] blfy, foi{k ds usrk ckj&ckj dg jgs gSa fd os efgyk vkj{k.k ds f[kykQ ugha gSaA gkykafd] ;g lp gS fd yksdlHkk vkSj fo/kkulHkk esa efgyk vkj{k.k dh ckr tc Hkh vkrh gS] dksbZ u dksbZ rduhdh vM+axk yxk fn;k tkrk gSA vxj fQj ,d ckj efgyk vkj{k.k ykxw djus dh dksf'k'ksa ukdke gksrh gSa] rks ;g fuLlansg fujk'kktud gksxkA D;k ifjlheu dk fojks/k djus okyk foi{k lgh gS\ D;k fcuk ifjlheu ds gh efgyk vkj{k.k orZeku lhVksa esa ykxw djuk csgrj gksxk\ ;fn ge efgykvksa dh utj ls ns[ksa] rks vHkh yksdlHkk esa 14 çfr'kr ls Hkh de efgyk,a gSaA ns'k esa dksbZ ikVhZ ,slh ugha gS] ftlus efgykvksa dks 33 çfr'kr lhVksa ij [kM+k fd;k gksA efgyk vkj{k.k dh tc ckr vkrh gS] rc efgykvksa dks i;kZIr fVdV u nsus okys nyksa dks Hkh nfyr&fiNM+h vkSj vYila[;d efgykvksa dh cgqr fpark gksus yxrh gSA
संसद के विशेष सत्र में सहमति न बनने की आशंका पहले से थी और यही होता दिख रहा है। महिला आरक्षण को लेकर सभी दलों में सहमति है, पर परिसीमन पर सहमति बनना कठिन है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जिस तरह से लोकसभा में विपक्ष को आड़े हाथ लिया है, उससे भी यही संकेत मिलता है कि बदलाव की राह आसान नहीं है। प्रमुख विपक्षी दल कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, द्रमुक न केवल नए बदलावों के खिलाफ एकजुट हैं, बल्कि इसे सरकार की साजिश करार दे रहे हैं। वास्तव में, इस पूरे मामले को राजनीतिक दृष्टि से देखा जा रहा है। राजनीतिक दलों से लेकर आम आदमी तक में यह चर्चा है कि महिला आरक्षण और परिसीमन से किसको लाभ होगा और किसको घाटा। माना जा रहा है कि दक्षिण के राज्यों को घाटा होगा और उत्तर के ताकतवर विपक्षी दल दक्षिण के राज्यों के साथ खड़े हो गए हैं। विपक्ष की यह राजनीतिक राह कम से कम उत्तर भारत में शायद जोखिम भरी हो सकती है।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को विपक्षी दलों को यही चेताया है कि महिलाओं के लिए किसी भी क्षेत्र में आरक्षण का विरोध करने वाले किसी व्यक्ति को महिलाओं ने नहीं बख्शा है। क्या वाकई, महिला आरक्षण के लागू न होने से महिलाएं नाराज होंगी? इस नाराजगी को विपक्ष समझता है, इसलिए विपक्ष के नेता बार-बार कह रहे हैं कि वे महिला आरक्षण के खिलाफ नहीं हैं। हालांकि, यह सच है कि लोकसभा और विधानसभा में महिला आरक्षण की बात जब भी आती है, कोई न कोई तकनीकी अड़ंगा लगा दिया जाता है। अगर फिर एक बार महिला आरक्षण लागू करने की कोशिशें नाकाम होती हैं, तो यह निस्संदेह निराशाजनक होगा। क्या परिसीमन का विरोध करने वाला विपक्ष सही है? क्या बिना परिसीमन के ही महिला आरक्षण वर्तमान सीटों में लागू करना बेहतर होगा? यदि हम महिलाओं की नजर से देखें, तो अभी लोकसभा में 14 प्रतिशत से भी कम महिलाएं हैं। देश में कोई पार्टी ऐसी नहीं है, जिसने महिलाओं को 33 प्रतिशत सीटों पर खड़ा किया हो। महिला आरक्षण की जब बात आती है, तब महिलाओं को पर्याप्त टिकट न देने वाले दलों को भी दलित-पिछड़ी और अल्पसंख्यक महिलाओं की बहुत चिंता होने लगती है।laln ds fo'ks"k l= esa lgefr u cuus dh vk'kadk igys ls Fkh vkSj ;gh gksrk fn[k jgk gSA efgyk vkj{k.k dks ysdj lHkh nyksa esa lgefr gS] ij ifjlheu ij lgefr cuuk dfBu gSA ç/kkuea=h ujsaæ eksnh us ftl rjg ls yksdlHkk esa foi{k dks vkM+s gkFk fy;k gS] mlls Hkh ;gh ladsr feyrk gS fd cnyko dh jkg vklku ugha gSA çeq[k foi{kh ny dkaxzsl] lektoknh ikVhZ] æeqd u dsoy u, cnykoksa ds f[kykQ ,dtqV gSa] cfYd bls ljdkj dh lkft'k djkj ns jgs gSaA okLro esa] bl iwjs ekeys dks jktuhfrd –f"V ls ns[kk tk jgk gSA jktuhfrd nyksa ls ysdj vke vkneh rd esa ;g ppkZ gS fd efgyk vkj{k.k vkSj ifjlheu ls fdldks ykHk gksxk vkSj fdldks ?kkVkA ekuk tk jgk gS fd nf{k.k ds jkT;ksa dks ?kkVk gksxk vkSj mÙkj ds rkdroj foi{kh ny nf{k.k ds jkT;ksa ds lkFk [kM+s gks x, gSaA foi{k dh ;g jktuhfrd jkg de ls de mÙkj Hkkjr esa 'kk;n tksf[ke Hkjh gks ldrh gSAç/kkuea=h ujsaæ eksnh us xq#okj dks foi{kh nyksa dks ;gh psrk;k gS fd efgykvksa ds fy, fdlh Hkh {ks= esa vkj{k.k dk fojks/k djus okys fdlh O;fä dks efgykvksa us ugha c['kk gSA D;k okdbZ] efgyk vkj{k.k ds ykxw u gksus ls efgyk,a ukjkt gksaxh\ bl ukjktxh dks foi{k le>rk gS] blfy, foi{k ds usrk ckj&ckj dg jgs gSa fd os efgyk vkj{k.k ds f[kykQ ugha gSaA gkykafd] ;g lp gS fd yksdlHkk vkSj fo/kkulHkk esa efgyk vkj{k.k dh ckr tc Hkh vkrh gS] dksbZ u dksbZ rduhdh vM+axk yxk fn;k tkrk gSA vxj fQj ,d ckj efgyk vkj{k.k ykxw djus dh dksf'k'ksa ukdke gksrh gSa] rks ;g fuLlansg fujk'kktud gksxkA D;k ifjlheu dk fojks/k djus okyk foi{k lgh gS\ D;k fcuk ifjlheu ds gh efgyk vkj{k.k orZeku lhVksa esa ykxw djuk csgrj gksxk\ ;fn ge efgykvksa dh utj ls ns[ksa] rks vHkh yksdlHkk esa 14 çfr'kr ls Hkh de efgyk,a gSaA ns'k esa dksbZ ikVhZ ,slh ugha gS] ftlus efgykvksa dks 33 çfr'kr lhVksa ij [kM+k fd;k gksA efgyk vkj{k.k dh tc ckr vkrh gS] rc efgykvksa dks i;kZIr fVdV u nsus okys nyksa dks Hkh nfyr&fiNM+h vkSj vYila[;d efgykvksa dh cgqr fpark gksus yxrh gSA
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